प्रथम सिद्धांत - अप्रतिबंधित एवं खुली सदस्यता:
सहकारी समिति ऐसे व्यक्तियों के लिए एक स्वतंत्र एवं अप्रतिबंधित संगठन है, जो इसकी सेवाओं का उपयोग करने में सक्षम हैं तथा बिना किसी लैंगिक, सामाजिक, जातीय, राजनीतिक एवं धार्मिक भेदभाव के सदस्यता की जिम्मेदारी स्वीकार करने के लिए सहमत हैं।
दूसरा सिद्धांत - सदस्यों का लोकतांत्रिक नियंत्रण:
सहकारी समिति एक लोकतांत्रिक संगठन है, जिसका नियंत्रण इसके सदस्यों द्वारा किया जाता है, जो इसके नीति निर्धारण एवं निर्णयों के रखरखाव में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं। प्रतिनिधि के रूप में निर्वाचित पुरुष एवं महिलाएँ सदस्यों के प्रति उत्तरदायी होते हैं। प्राथमिक सहकारी समिति के सदस्यों को समान मताधिकार (एक सदस्य-एक मत) प्राप्त होता है तथा सहकारी समिति का गठन अन्य स्तरों पर भी लोकतांत्रिक तरीके से होता है।
तीसरा सिद्धांत - सदस्यों की आर्थिक भागीदारी:
सदस्य अपनी समितियों की पूंजी में योगदान करते हैं तथा लोकतांत्रिक तरीके से उसका नियंत्रण करते हैं। पूंजी का कम से कम एक हिस्सा सहकारी समिति की सार्वजनिक संपत्ति होती है। सदस्यता की शर्त के रूप में योगदान की गई पूंजी के विरुद्ध सदस्य को आमतौर पर सीमित प्रतिफल, यदि कोई हो, मिलता है। सदस्य निम्नलिखित में से किसी भी उद्देश्य के लिए अधिशेष आवंटित करते हैं, अपनी समिति के विकास के लिए संभावित आरक्षित निधि स्थापित करते हैं, जिसका कुछ हिस्सा अविभाज्य होगा, समिति के सदस्यों को उनके योगदान के अनुपात में लाभ प्रदान करना तथा सदस्यों द्वारा अनुमोदित अन्य गतिविधियों का समर्थन करना।
चौथा सिद्धांत - स्वायत्तता और स्वतंत्रता:
सहकारी समिति एक स्वायत्त और आत्मनिर्भर संगठन है जिसका नियंत्रण उसके सदस्यों द्वारा किया जाता है। यदि वे सरकार सहित अन्य संगठनों के साथ अनुबंध करते हैं या बाहरी स्रोतों से पूंजी की व्यवस्था करते हैं, तो वे ऐसा अपने सदस्यों द्वारा लोकतांत्रिक नियंत्रण सुनिश्चित करने और अपनी सहकारी समिति की स्वायत्तता बनाए रखने के लिए करते हैं।
पांचवां सिद्धांत - शिक्षा, प्रशिक्षण और सूचना:
सहकारी समिति अपने सदस्यों, निर्वाचित प्रतिनिधियों, प्रबंधकों और कर्मचारियों को शिक्षा और प्रशिक्षण प्रदान करती है, ताकि वे अपनी सहकारी समिति के विकास में प्रभावी रूप से योगदान दे सकें और वे आम जनता विशेषकर युवाओं और नेतृत्व को सहकारिता की प्रकृति और लाभों के बारे में जानकारी प्रदान कर सकें।
छठा सिद्धांत - सहकारी समितियों में सहकारिता:
सहकारी समिति स्थानीय, क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर काम करके अपने सदस्यों की प्रभावी रूप से सेवा करती है और सहकारी आंदोलन को मजबूत बनाती है।
सातवां सिद्धांत - समुदाय की देखभाल:
सहकारी समिति अपने सदस्यों द्वारा अनुमोदित नीतियों के माध्यम से अपने समुदाय के स्थिर विकास के लिए काम करती है।