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सहकार से समृद्धि

सहकार से समृद्धि

“सहकार से समृद्धि" के दृष्टिकोण को साकार करने, देश में सहकारी आदोलन को मजबूत करने जमीनी स्तर तक सहकारी समितियों की पहुंच को गहरा करने और सहकारी समितियों के प्रदर्शन, उत्पादकता और लाभप्रदत्ता को बढ़ाने के लिए, सहकारिता मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा विभिन्न पहल प्रारंभ किये गये हैं, जिनमें से प्रमुख पहल एवं उनमें राज्य की प्रगति निम्नानुसार है:-

  • पैक्स को बहु-उद्देशीय बनाने के लिए आदर्श उपविधियां - पैक्स और लैम्प्स की आय के स्रोत बढ़ाने तथा 25 से अधिक क्षेत्रों जैसे डेयरी, मात्स्यिकी, भण्डारण इत्यादि में रोजगार के नए अवसर सृजित करने के उद्देश्य से भारत सरकार सहकारिता मंत्रालय द्वारा तैयार किये गये आदर्श उप-विधि के ड्राफ्ट को प्रदेश के सभी 2058 पैक्स/लैम्प्स में अंगीकृत कर लिया गया है।
     
  • प्रत्येक ग्राम पंचायत में बहुद्देशीय सहकारी सोसाइटी की स्थापना - भारत सरकार सहकारिता मंत्रालय द्वारा प्रत्येक ग्राम पंचायत को सहकारी समितियों से जोड़ने तथा सहकारिता के लाभ को जन-जन तक पहुंचाने के लिये राज्य के सभी अनाच्छादित एवं अल्पसेवित ग्राम पचायतों में बहुद्देशीय पैक्स/दुग्ध/मत्स्य / लघुवनोपज सहकारी समितियों के गठन की योजना प्रारंभ की गयी है। इस योजना में अकार्यशील / परिसमापनाधीन समितियों को कार्यशील बनाने अथवा परिसमापित करने तथा शेष अनाच्छादित/अल्पसेवित पंचायतों में नवीन बहुद्देशीय पैक्स/दुग्ध/ मत्स्य/ लघुवनोपज सहकारी समितियों का गठन किया जाना है। योजना का क्रियान्वयन वर्ष 2024-25 से वर्ष 2028-29 तक किया जाना है।
    पहल अत्तर्गत दिनांक 15.02.2023 से दिनांक 31.12.2024 तक राज्य में 183 मत्स्य, 123 लघु वनोपज तथा 86 नवीन दुग्ध सहकारी समितियों का पंजीयन किया गया है।
     
  • डिजिटाईजेशन ऑफ प्राईमरी एग्रीकल्चरल क्रेडिट को-ऑपरेटिव्ह सोसाइटीज - सहकारी सोसाइटियों का कम्प्यूटरीकरण करने से सोसाइटियों में किसानों के सभी ऋण अमानत, खातों में व्याज की गणना तथा लेन-देन का हिसाब-किताब तातारीख पूर्ण रहेगा, जिससे किसानों को अपने खातों की सही जानकारी तत्काल प्राप्त हो जाएगी।
    प्रदेश में संचालित सभी 2058 प्राथमिक कृषि साख सहकारी सोसाइटियों का कम्प्यूटरीकरण केन्द्र प्रवर्तित योजना अंतर्गत किया जा रहा है, जिसके लिए प्रथम चरण में राज्य के 2028 समितियों का चयन किया गया है। योजना का क्रियान्वयन 2022-23 से प्रारंभ किया गया है। योजना अतर्गत केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा खर्च का अनुपात 60:40 है। योजनातर्गत डिजिटलाईजेशन में प्रति सोसाइटी रू. 03.91 लाख की लागत अनुमानित है। 31 दिसम्बर की स्थिति में राज्य के सभी चयनित पैक्स Go-Live स्तर में पहुंच गये हैं।
     
  • कॉमन सर्विस सेन्टर - भारत सरकार, सहकारिता मंत्रालय द्वारा सभी प्राथमिक कृषि साख सहकारी सोसाइटियों को कॉमन सर्विस सेन्टर के रूप में विकसित करने हेतु निर्देश दिए गये हैं। दिनांक 31.12.2024 की स्थिति में 2,017 पैक्स सोसाइटियों द्वारा आई.डी. हेतु ऑनलाईन आवेदन किया जा चुका है, जिनमें से 1929 आई डी. एक्टिव हो चुके हैं। दिनांक 31.12.2024 तक राशि रु. 1.38 करोड़ का संव्यवहार किया गया है।
     
  • प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केन्द्र - ग्रामीण/ब्लॉक स्तर पर सस्ती जेनेरिक दवाईयों की आम लोगों के लिए उपलब्धता तथा पैक्स में आय एवं रोजगार के अतिरिक्त अवसर उपलब्ध कराने हेतु भारत सरकार, सहकारिता मंत्रालय द्वारा पैक्स समितियों में प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केन्द्र खोले जाने का निर्णय लिया गया है। उक्त अनुक्रम में राज्य के कुल 26 समितियों में स्टोर प्रारंभ कर लिया गया है।
     
  • प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केन्द्र की स्थापना - पैक्स को खुदरा उर्वरक विक्रेता के रूप में कार्य करने एव कृषि संबंधी सभी आदानों और सेवाओं के लिए वनस्टॉप शॉप के रूप में विकसित करने तथा उर्वरक एवं कीटनाशक छिडकाव के लिए ड्रोन उद्यमी के रूप में कार्य देने आदि के लिए योजना प्रारंभ की गयी है। राज्य के सभी 2058 पैक्स में प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केन्द्र की स्थापना की जा चुकी है।
     
  • सहकारी क्षेत्र में विश्व की सबसे बड़ी विकेन्द्रीकृत अन्न भण्डारण योजना - योजनान्तर्गत भारत सरकार की विभिन्न योजनाओं यथा AIF, AMI, SWAM, MIDH, PMFME तथा PMKSY के अभिसरण से पैक्स में खरीदी केंद्र, कस्टम हायरिंग सेंटर, प्राथमिक प्रसंस्करण केंद्र, ग्रामीण हाट सहित अनाज भण्डारण हेतु बुनियादी ढांचे का निर्माण शामिल है। राज्य में RIDF योजनान्तर्गत निर्माणाधीन 200 मीट्रिक टन क्षमता के सभी 725 गोदामों को भारत सरकार, सहकारिता मंत्रालय द्वारा योजना में शामिल कर लिया गया है।
     
  • राष्ट्रीय सहकारी निर्यात/जैविक/बीज सहकारी समिति की सदस्यता - बहुराज्य सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 2002 के तहत् तीन नई राष्ट्रीय सहकारी समितियां क्रमशः राष्ट्रीय सहकारी निर्यात समिति लिमिटेड, भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड तथा राष्ट्रीय सहकारी जैविक समिति लिमिटेड की स्थापना एक अम्ब्रेला संगठन के रूप में की गई है, जिनके द्वारा क्रमशः सहकारी क्षेत्र में उत्पादित वस्तुओं के निर्यात को बढ़ावा देने, एकल ब्राण्ड अंतर्गत उन्नत बीजों की खेती, उत्पादन व वितरण करने तथा प्रमाणित व प्रमाणिक जैविक उत्पादों के उत्पादन, वितरण व विपणन का कार्य किया जाएगा। राज्य की प्राथमिक, जिला तथा राज्य स्तरीय समितियां इन समितियों की सदस्य बन सकती हैं। राज्य के सभी पैक्स द्वारा इन समितियों में सदस्यता हेतु आवेदन पूर्ण कर लिया गया है।
     
  • राष्ट्रीय सहकारी डाटाबेस - भारत सरकार, सहकारिता मंत्रालय द्वारा राज्य सरकारों के सहयोग से एक व्यापक, प्रमाणिक और अद्यतन सहकारी डाटाबेस विकसित किया गया है। राज्य के सभी कार्यशील समितियों की प्रविष्टि पोर्टल में कर ली गयी है।
     
  • पंजीयक कार्यालय एवं उनके अधीनस्थ कार्यालयों के कम्प्यूटरीकरण की योजना - भारत सरकार, सहकारिता मंत्रालय द्वारा सहकारी सोसाइटियों के व्यापार को सुगम बनाने एवं पारदर्शी पेपर रहित विनियमन का एक डिजिटल ईको सिस्टम बनाने के लिए राज्य के आयुक्त सहकारिता एवं पंजीयक सहकारी संस्थाएं कार्यालय एवं उसके अधीनस्थ कार्यालयों के कम्प्यूटरीकरण के लिए केन्द्र प्रवर्तित योजना प्रारंभ की गयी है। योजनान्तर्गत हार्डवेयर का व्यय केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा 60:40 के अनुपात में तथा साफ्टवेयर एवं क्लाउड इन्फ्रास्ट्रक्चर का व्यय शतप्रतिशत भारत सरकार द्वारा वहन किया जाना है।
     
  • अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष - संयुक्त राष्ट्र महासंघ द्वारा वर्ष 2025 को अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष घोषित किया गया है, जिसका थीम "सहकारिता एक बेहतर दुनिया का निर्माण करती है" रखा गया है।उक्त अनुक्रम में भारत सरकार सहकारिता मंत्रालय द्वारा वर्ष 2025 को सहकारिता के प्रचार-प्रसार के लिए पूरे वर्ष भर आयोजन का लक्ष्य रखा गया है।राज्य सरकार द्वारा इसी तारतम्य में राज्य में वर्ष भर कार्यक्रमों के आयोजन के लिए वार्षिक गतिविधियों का कैलेण्डर तैयार किया गया है, जिसके अन्तर्गत ग्राम, जिला एवं राज्य स्तर पर कुल 106105 गतिविधियों का आयोजन किया जाना है।
     
  • NCCF के ई-सम्युक्ति तथा NAFED के ई-समृद्धि पोर्टल में पंजीयन - राज्य शासन द्वारा "प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान" अंतर्गत खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में अरहर, मूंग, उड़द, मूंगफली एवं सोयाबीन तथा रबी विपणन वर्ष 2025-26 में चना, मसूर, सरसों एवं दलहन तिलहन फसल के साथ वर्ष 2024-25 में मक्का फसल के उपार्जन हेतु NAFED एवं NCCF को उपार्जन एजेंसी एवं मार्कफेड को प्रदेश में योजना के क्रियान्वयन हेतु नोडल एजेंसी नियुक्त किया गया है। इन संस्थाओं द्वारा उपार्जन का कार्य पैक्स के माध्यम से किया जाना है। उक्त उपार्जन बाबत् NCCF के ई-सम्युक्ति पोर्टल में सभी पैक्स पंजीयन कराने वाला छत्तीसगढ़ पहला एवं एकमात्र राज्य है तथा NAFED के ई-समृद्धि पोर्टल में पैक्स के पंजीयन की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है।
     
  • पैक्स द्वारा ग्रामीण जल आपूर्ति - "सहकार से समद्धि" की संकल्पना अंतर्गत पैक्स को जल जीवन मिशन के तहत् नल-जल योजना के संचालन एवं रख-रखाव का कार्य दिये जाने बाबत् निर्देश के अनुक्रम में राज्य में विभिन्न जिलों के 33 पंचायतों का चयन पायलट के तौर पर किया गया है।